क्या सिगरेट तम्बाकू का सेवन करने वाले लोगों में कम है कोरोना का खतरा? आइए जानते है क्या कहता है सर्वे रिपोर्ट

नईदिल्ली :स्‍मोकिंग करने वाले और शाकाहारी लोगों में सेरो-पॉजिटिविटी का स्‍तर कम है. जबकि, O ब्‍लड ग्रुप के लोग कोरोना वायरस के प्रति कम संवेदनशील हो सकते हैं. ये बातें काउंसिल ऑफ साइंटिफिक और इं‍डस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के एक पैन-इंडिया सेरोसर्वे में निकलकर सामने आई हैं. इस स्‍टडी में SARS-CoV-2 के खिलाफ इंसानों के शरीर में बनने वाले एंटीबॉडी के बारे में पता लगाया गया. यह भी देखा गया कि किसी व्‍यक्ति के कोविड-19 बीमारी से संक्रमित होने का कितना रिस्‍क है.

140 डॉक्‍टर्स और वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस स्‍टडी में 10,427 व्‍यस्‍कों को शामिल किया गया है. इस सर्वे में शामिल हुए लोगों में CSIR के 40 लैबोरेटरीज और अन्‍य सेंटर्स में काम करने वाले लोग व उनके परिवार के सदस्‍य थे।

सर्वे के नतीजों से पता चला कि कोविड-19 भले ही सांस से संबंधित बीमारी है, लेकिन, स्‍मोकिंग करने वाले लोगों को इससे से कुछ हद तक बचाव करने में मदद मिल रही है.

स्‍मोकिंग और निकोटिन को लेकर विस्‍तृत स्‍टडी की जरूरत

ऐसा इसलिए है क्‍योंकि स्‍मोंकिंग की वजह से म्‍युकस का प्रोडक्‍शन अधिक मात्रा में होता है. हालांकि, इस सर्वे रिपोर्ट में चेतावनी दिया गया कि कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर स्‍मोकिंग और निकोटिन के असर पर अलग तरह विस्‍तृत स्‍टडी किए जाने की जरूरत है. इसमें जोर देकर लिखा गया, ‘स्‍वास्‍थ्‍य के लिए धुम्रपान को हानिकारक बताया जाता है और इससे इंसानों में कई तरह की बीमारियां होती हैं. ऐसे में यह स्‍टडी स्‍मोकिंग के समर्थन में नहीं है.’

न्‍यूज़ एजेंसी पीटीआई ने अपनी एक रिपोर्ट में इस स्‍टडी के हवाले से बताया कि फाइबर युक्‍त शाकाहारी भोजन करने वाले लोगों में कोविड-19 के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता ज्‍यादा है. शाकाहारी भोजन में पाए जाने वाले फाइबर में सूजनरोधी तत्‍व होते हैं. यह आंतों में पाए जाने वाले माइक्रोबायोटा की वजह से होता है.

AB ब्‍लड ग्रुप में सबसे ज्‍यादा सेरो-पॉजिटिविटी

इस सर्वे में यह भी पता चला कि O ब्‍लड ग्रुप के लोगों इस संक्रमण के प्रति कम संवेदनशील हैं. जबकि, B और AB ब्‍लड ग्रुप वाले लोगों के संक्रमित होने का खतरा सबसे अधिक है. AB ब्‍लड ग्रुप में सेरो-पॉजिटिविटी सबसे ज्‍यादा पाई गई. जबकि O ब्‍लड ग्रुप के लोगों में कोरोना का खतरा कम है.

स्‍मोकर्स को लेकर दूसरे देशों की स्‍टडी क्‍या कहती है?

इसके पहले फ्रांस, इटली, चीन व न्यूयॉर्क के ऐसे ही स्‍टडी से पता चलता है कि स्‍मोकिंग करने वाले लोगों में कोविड-19 संक्रमण दर कम है. सेंटर फॉर डीजीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDC) द्वारा अमेरिका के 7,000 कोविड-19 मरीजों पर की गई स्‍टडी में भी कुछ ऐसे ही नतीजे सामने आए. रोचक बात है कि CSIR के सर्वे में भाग लेने वाले 1.3 फीसदी लोग स्‍मोकिंग करते हैं. जबकि अमेरिका के सीडीएस द्वारा किए गए सर्वे में 14 फीसदी लोग स्‍मोकिंग करते थे.

यूनिवर्सिट कॉलेज ऑफ लंदन ने ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और अमेरिका से पब्लिश हुए 28 पेपर्स को को विस्‍तृत रूप से पढ़ने के बाद पाया कि अस्‍पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में स्‍मोकिंग करने वालों की संख्‍या कम थी. यूनाइटेड‍ किंग्‍डम की एक स्‍टडी से पता चला कि स्‍मोकिंग करने वाले लोगों कोविड-19 मरीजों को अनुपात करीब 5 फीसदी ही थी. जबकि, राष्‍ट्रीय दर पर पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों की तुलना में यह करीब एक तिहाई था.

फ्रांस की स्‍टडी में पाया गया कि वहां 32 फीसदी लोगों में से करीब 7.1 फीसदी ही ऐसे लोग थे जो स्‍मोकिंग करते थे और वे कोविड-19 के शिकार बनें. चीन के केस स्‍टडी से पता चलता है कि वहां कुल मरीजों में से केवल 3.8 फीसदी मरीज ही पहले स्‍मोकिंग करते थे।

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