अभिषेक मिश्रा हत्याकांड में 6 साल बाद आया बड़ा फैसला:बहुचर्चित हत्याकांड के आरोपी विकास और अजित सिंह को आजीवन कारावास, किम्सी जैन बरी

दुर्ग। भिलाई के बहुचर्चित अभिषेक मिश्रा हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दो आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले में न्यायालय ने एक आरोपित को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश श्रीवास्तव ने इस मामले में फैसला सुनाया। कोरोना काल को ध्यान में रखते हुए फैसला ऑनलाइन सुनाया गया। मामले में दो मुख्य आरोपित विकास जैन और अजीत सिंह को धारा 302 में आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

लोक अभियोजक बाल मुकुंद चंद्राकर ने बताया कि आजीवन कारावास से आशय आरोपितों को अंतिम सांस तक जेल में ही रहना है।

इस मामले के अन्य आरोपित विकास जैन की पत्नी किम्सी जैन को न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। घटना नवंबर 2015 की है। शंकराचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज जुनवानी के डायरेक्टर अभिषेक मिश्रा नौ नवंबर 2015 को अपने घर से निकले थे, लेकिन वे घर नहीं लौटे।

दूसरे दिन उनके अपहरण की शिकायत जेवरा सिरसा पुलिस में दर्ज कराई गई। पुलिस ने करीब 15 दिन बाद अभिषेक के शव को स्मृति नगर स्थित एक अपार्टमेंट की खाली जगह से बरामद किया था। अभिषेक मिश्रा की हत्या के बाद उसके शव को बोरी में भरकर गढ्ढा खोदकर पाट दिया गया था। जहां अभिषेक के शव को दफनाया गया था उस अपार्टमेंट में प्रकरण का एक आरोपित किराए का मकान लेकर रह रहा था।

जांच के बाद पुलिस ने इस मामले मे विकास जैन, उसकी पत्नी किम्सी जैन और चाचा अजीत सिंह के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण सुनवाई के लिए जिला एवं सत्र न्यायालय दुर्ग की अदालत में पेश किया था।

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