प्रशासन चल रही कछुए की चाल:अभीतक तैयार नहीं हुई चिटफंड कंपनियों की कुंडली,जालसाजी के शिकार लोग पैसा मिलने की आंस में कर रहे 1वर्ष से इंतजार

दुर्ग: एक वर्ष बीतने के बाद भी चिटफंड कंपनी के मकड़जाल में फंसे फरियादियों को न्याय नहीं मिल पाया है, यहां प्रशासनिक लचरता व्यवस्था के कारण अब तक आवेदन की एंट्री नहीं की गई है। एक वर्ष पूर्व लोगों ने भूखे प्यासे लंबी लाइन लगा कर दुर्ग और अन्य ब्लॉकों में अपनी जानकारी जमा कराई थी। लेकिन एक वर्ष बित जाने के बाद फरियादियों को कोई जानकारी ही नहीं मिल पाई है कि आखिर उन्हें उनकी डूबती राशि कब मिलेगी जबकि पड़ोसी जिला राजनांदगांव में चिटफंड कंपनी की संपत्ति कुर्की कर 10 करोड़ की नीलामी की गई और नीलामी की राशि आवेदकों में बांट दी गई है। लेकिन दुर्ग में अब तक अफसर कुर्सी तोड़ने में सिमट कर रह गए हैं।

राज्य शासन के निर्देश पर चिटफंड कंपनी में रकम जमा करने वाले निवेशकों से आवेदन मांगे गए थे इस दौरान जिले भर से करीब दो लाख आवेदन सामने आए हैं।इसमें पिछले 1 साल से एंट्री चल रही है खबर है कि दुर्ग ब्लॉक को छोड़ शेष ब्लॉकों के आवेदन की एंट्री पूरी कर ली गई है। लेकिन दुर्ग ब्लॉक में हजारों प्रकरण कि अब तक एंट्री नहीं किए जाने से चिटफंड कंपनी की कुंडली तैयार नहीं हो सकी है। ऐसे में प्रशासन को चिटफंड कंपनियों के संपत्ति खोजने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

जबकि इधर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में सख्त रुख अख्तियार करते हुए पुलिस प्रशासन को चिटफंड कंपनी पर कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।

दुर्ग जिले में अब तक पुलिस की कार्यवाही सार्वजनिक नहीं हो पाई है। यही कारण है कि डुबत राशि का सपना लिए बैठे निवेशको मे आक्रोश स्थिति भी निर्मित होने लगी है।

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