कलेक्टर का एक्शन, 3 अस्पताल और लैब सील:लाइसेंस के बिना हो रहे थे संचालित, 20-20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया

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अमरेंद्र सिंह

दुर्ग कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने नर्सिंग होम एक्ट को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। ग्रामीण क्षेत्र में संचालित तीन हॉस्पिटल और एक लैब को बंद कर दिया गया है। 20-20 हजार रुपए का फाइन भी लगाया गया है। ये चारों संस्थान बिना लाइसेंस के चला रहे थे। नर्सिंग होम एक्ट का पालन नहीं किया जा रहा था।

गंगोत्री हॉस्पिटल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर धमधा, सीतादेवी क्लीनिक श्याम प्लाजा ग्राउंड फ्लोर अहिवारा रोड कुम्हारी, नंदिनी नर्सिंग होम वार्ड नं. 7 अहिवारा और लैब केयर डायग्नोस्टिक, वार्ड 6 अहिवारा में नर्सिंग होम एक्ट गाइड लाइन की अनदेखी हो रही थी। शिकायत मिलने पर जांच टीम ने पाया कि चारों संस्था के संचालकों के पास नर्सिंग होम एक्ट का लाइसेंस ही नहीं है। बिना लाइसेंस के संस्था का संचालन किया जा रहा था। रिपोर्ट मिलने के साथ ही इन सभी के खिलाफ नर्सिंग होम एक्ट की धारा 12 (क) (1) के तहत 20-20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया और उन्हें लाइसेंस नहीं मिलने तक बंद करने का आदेश दिया गया।

5 दिन के अंदर जुर्माना जमा करने के निर्देश
कलेक्टर ने बताया कि नर्सिंग होम एक्ट लाइसेंस के बिना चिकित्सकीय संस्था का संचालन नर्सिंग होम एक्ट 2010 और 2013 का उल्लंघन है। सभी संस्था संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वो जुर्माने की राशि नोटिस जारी होने के 5 दिन के भीतर ’सुपरवाईजरी अथॉरिटी सी.जी. नर्सिंग होम एक्ट डिस्ट्रिक्ट दुर्ग’ के नाम पर बैंक ड्राफ्ट बनवाकर कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दुर्ग में जमा करें। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आरटीआई में जानकारी छुपाने पर अस्पताल संचालक पर जुर्माना
कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने वीवाय हॉस्पिटल दुर्ग के संचालक पर भी 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। उसने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी को छिपाते हुए मरीज के इलाज की गलत जानकारी दी थी। वीवाय हॉस्पिटल पद्मनाभपुर दुर्ग के संचालक को कई बार सही जानकारी देने के लिए निर्देश दिया गया था, लेकिन उसने मरीज के चिकित्सकीय उपचार संबंधी जानकारी नहीं दी।

उन्होंने मरीज के उपचार की जानकारी न होने की बात कही, जबकि छत्तीसगढ़ राज्य उपर्चायगृह एवं रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम के तहत प्रत्येक नर्सिंग होम, क्लीनिक एवं अस्पताल को मरीज का इलाज शुरू होने की तारीख से 5 साल तक मेडिकल रिकार्डों को संभालकर रखना है।

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